सवाल: जो शख्स रोज़ा न रखे, उस पर सदक़ा ऐ फ़ित्र वाजिब है या नहीं?
मुस्तफ़्ती: जमीअल अहमद, महराज गंज, ज़िला बस्ती
بِسْمِ اللہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ
اَلْجَوَابُ بِعَوْنِ الْمَلِکِ الْوَھَّابِ اَللّٰھُمَّ ھِدَایَۃَ الْحَقِّ وَالصَّوَابِ
अल-जवाब:
सदक़ा-ए-फ़ित्र वाजिब होने के लिए रोज़ा रखना शर्त नहीं, लिहाज़ा जो शख्स मालिके निसाब हो, अगर किसी उज्र मसलन सफ़र, मर्ज़, बुढ़ापे की वजह से या معاذ اللہ बिना उज्र के रोज़ा न रखे, तब भी उस पर सदक़ा-ए-फ़ित्र वाजिब है।
रद्दुल मुहतार में है कि
تجب الفطرة وإن أفطر عامدا. [ابن عابدين، رد المحتار على الدر المختار، ج: ٢، ص: ٣٦١، دار الفكر، بيروت]
फिर दो सतर के बाद है:
من أفطر لكبر أو مرض أو سفر يلزمه صدقة الفطر [المرجع السابق]
[फ़तावा-ए-फ़ैज़ुर्रसूल, ज: 1, स: 507]