सवाल
अगर किसी की नमाज़-ए-तरावीह रह जाए, तो क्या वह गुनहगार होगा? और क्या उसकी क़ज़ा लाज़िम होगी?
بِسْمِ اللہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ
اَلْجَوَابُ بِعَوْنِ الْمَلِکِ الْوَھَّابِ اَللّٰھُمَّ ھِدَایَۃَ الْحَقِّ وَالصَّوَابِ
रमज़ानुल मुबारक में हर अक़्लमंद, बालिग़, ग़ैर-माज़ूर मर्द और औरत के लिए रोज़ाना बीस रकअत तरावीह अदा करना सुन्नत-ए-मुअक्कदा है। अगर बिना उज्र एक-दो बार छोड़ दी, तो यह बुरा (इसाअत) है, लेकिन अगर इसे छोड़ने की आदत बना ली जाए, तो यह गुनाह होगा।
इसलिए अगर किसी ने बिना किसी शरीअी उज्र के तरावीह की नमाज़ एक बार छोड़ दी, तो वह इसाअत (बुरी बात) का मुर्तकिब हुआ और अगर इसे छोड़ने की आदत बना ली, तो वह गुनहगार होगा और उस पर तौबा लाज़िम होगी। लेकिन इसकी क़ज़ा नहीं है।
وَاللہُ اَعْلَمُ عَزَّوَجَلَّ وَرَسُوْلُہ اَعْلَم صَلَّی اللّٰہُ تَعَالٰی عَلَیْہِ وَاٰلِہٖ وَسَلَّم